भारत एक विशाल देश हैं जिसका इतिहास बेहद अनोखा और संघर्षपूर्ण रहा हैं.

आज इस कड़ी में उन निर्माण के बारे में बताने जा रहे हैं जो भारत की आजादी से पहले के समय की बनी हुई हैं.

कर्नाटक स्थित ये हुबली मंदिर हिन्दू संस्करती का प्रतीक है. 

वास्तुकला उस दौर मे असल भारत दर्शन थी.

देश के दक्षिणी हिस्से मे स्थित इस धरोहर के कहने ही क्या.

दक्षिण भारत अनेकों अनेक ऐसे मंदिर हैं जिन्हे बने हुए हजारों साल हो गए. 

राष्ट्रपति भवन, दिल्ली : राष्ट्रपति भवन भारत में मौजूद सबसे प्रतिष्ठित इमारतों के अलावा अपनी प्रभावशाली वास्तुकला के और भारत के राष्ट्रपति के सरकारी निवास स्थान के रूप में जाना जाता है. 

ये है जयपुर का सबसे मशहूर किला जिसे यहाँ के राजा ने बनाया था.

गेटवे ऑफ इंडिया, मुंबई : मुंबई के कोलाबा में स्थित गेटवे ऑफ इंडिया वास्तुशिल्प का चमत्कार है और इसकी ऊँचाई लगभग आठ मंजिल के बराबर है.

इंडिया गेट, दिल्ली : दिल्ली के सभी मुख्य आकर्षणों में से पर्यटक, इंडिया गेट जाना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं. दिल्ली के ह्रदय में स्थापित यह भारत के एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में शान से खड़ा है.

हावड़ा ब्रिज : रवीन्द्र सेतु, भारत के पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के उपर बना एक "कैन्टीलीवर सेतु" है. यह हावड़ा को कोलकाता से जोड़ता है. इसका मूल नाम "नया हाव दा पुल" था जिसे 14 जून सन् 1965 को बदलकर ‘रवीन्द्र सेतु’ कर दिया गया.

पमबन का पुल : भारत का पहला समुद्री पुल यानी कि ‘पमबन पुल’ 1914 में यातायात के लिए खोला गया था. फरबरी 2016 में इस पुल के निर्माण ने 102 वर्ष पूरे कर लिए हैं. यह 6776 फीट लम्बा पुल धार्मिक स्थल रामेश्वरम को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ता है. 

विक्टोरिया मैमोरियल, कोलकाता : विक्टोरिया मैमोरियल भारत में अंग्रेजी राज को दी गई एक श्रद्धांजलि है, इसे पुनः निर्मित किया गया था और यह ताजमहल पर आधारित था. इसे आम जनता के लिए 1921 में खोला गया था, इसमें शाही परिवार की कुछ तस्वीरें भी हैं.

विक्टोरिया टर्मिनस, मुंबई : वी. टी. स्टेशन जिसे छत्रपति शिवाजी स्टेशन भी कहा जाता है, कई वर्षों से मुंबई का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है. यहाँ शहरी युवाओं की भीड़ रहती है और इस क्षेत्र के फुटपाथ और सबवे में कई आवश्यक वस्तुएँ जैसे इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ, कंप्यूटर बाज़ार और कपड़े की दुकाने हैं.

दिल्ली का पुल :यमुना नदी पर बने इस पुल को पूर्वी दिल्ली का पुल भी कहा जाता है. इस जगह पर सबसे पहले मुग़ल सम्राट जहाँगीर ने किले को शहर से जोड़ने के लिए 1622 में लकड़ी के एक पुल का निर्माण कराया था.अंग्रजों ने इसी पुल को लोहे के गर्टरों से बनवाया था जो कि 12 अक्टूबर 1883 को बनकर तैयार हुआ था. 1917 में आये एक तूफ़ान में यह गंभीर रूप से क्षति ग्रस्त हो गया था लेकिन दुबारा बना लिया गया.

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